
21 अप्रैल 2026

मान्यवर एवं परम आदरणीय स्वजातीय बंधुओं,
सादर जय जिनेन्द्र।
हम सभी को यह स्मरण रखना है कि सोनागिर सिद्ध क्षेत्र में निर्माणाधीन 'जैन सेवा सदन' परिसर में केवल एक जैन मंदिर जी का ही निर्माण नहीं हो रहा है, बल्कि इसके साथ 5-6 अन्य भवनों का भी निर्माण होना प्रस्तावित है। इसके माध्यम से गोलालारे जैन समाज अपनी धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक उन्नति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर सकेगा। इसे गोलालारे जैन समाज के राष्ट्रीय गौरव स्थल के रूप में पहचाना जाएगा, जिस पर वर्तमान व भावी पीढ़ी गर्व से कह सकेगी कि यह हमारे पूर्वजों की धरोहर है।
वर्ष 2024 के अंतिम दिनों में नवगठित "भारत वर्षीय दिगम्बर गोलालारे जैन सेवा न्यास" के माध्यम से पिछले 40-50 वर्षों का यह सामूहिक सपना पूर्ण हुआ है। यह एक साधारण सी उपलब्धि नहीं, बल्कि गोलालारे जैन समाज के इतिहास का मील का पत्थर है।
अध्यक्ष के स्वागत उद्बोधन (दिनांक 26.04.2026) के साथ, न्यास अपनी द्वितीय वार्षिक बैठक में अब तक हुए कार्यों की रिपोर्ट आपकी स्वीकृति हेतु प्रस्तुत कर रहा है:
1. स्वाध्याय भवन (दो मंजिला): बेसमेंट (पार्किंग) के ऊपर भव्य स्वाध्याय भवन का निर्माण प्रगति पर है। इसके सामने 2,500 से 3,000 वर्ग फीट का पक्का खुला मैदान भी बनाया जाएगा।
2. 14 कमरों व 4 छोटे हॉल का निर्माण: इन कमरों की बुकिंग प्रारंभ हो चुकी है (एक कमरा व एक हॉल बुक हो चुका है)।
3. श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन गज मंदिर: 24 पिलरों पर निर्मित यह 3 शिखरों और 3 वेदियों वाला भव्य मंदिर होगा, जिसमें 9 अचल और 12-15 चल प्रतिमाएं विराजमान होंगी।
4. बहुमंजिला आधुनिक धर्मशाला: 500 गज (लगभग 5,000 वर्ग फीट) भूमि में इस 5 मंजिला धर्मशाला का निर्माण श्री राजीव जैन (सुपुत्र श्री डाल चन्द्र जैन) के विशेष सहयोग से सम्पन्न होगा।
5. गेस्ट हाउस एवं वात्सल्य भवन: नए भूखंड (लगभग 10,000 वर्ग फीट) पर 1 BHK फ्लैट्स और वात्सल्य भवन (आश्रम) का निर्माण।
6. भव्य प्रवेश द्वार एवं बाउंड्री वॉल: इसका निर्माण श्री मनोज जैन व श्री विपिन जैन (सुपुत्र श्री वीरेन्द्र कुमार जैन, मुम्बई) के सहयोग से सम्पन्न होगा।
अन्य कार्य: अस्थाई जैन मंदिर (1 या 3 प्रतिमाओं के साथ), ध्वजारोहण स्थल, और वाटर हार्वेस्टिंग व ट्रीटमेंट प्लांट।
न्यास जैन सेवा सदन को केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं रखना चाहता। आज समाज तेजी से न्यूक्लियर परिवारों की ओर बढ़ रहा है। हमारे उम्रदराज बुजुर्ग सदस्य अपना स्थान खोते जा रहे हैं। कुछ के पास साधन नहीं हैं, और जिनके पास हैं, उनकी संतानों के पास समय का अभाव है।
इसी सामाजिक यथार्थ को ध्यान में रखते हुए, सोनागिर में एक ऐसा पारिवारिक व प्राकृतिक परिसर विकसित किया जा रहा है जहाँ 60 वर्ष की आयु के पश्चात हमारे समाज के वरिष्ठजन अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुरूप सम्मानजनक रूप से अपना शेष जीवन और अंतिम समय (समाधि पूर्वक) व्यतीत कर सकें।
हम सभी से निवेदन करते हैं कि इस ईश्वरीय कार्य में बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दें। यह कार्य वेतनभोगी कर्मचारियों से नहीं, बल्कि आपके समर्पण से पूरा होगा। आप सभी ने जिस सामाजिक 'वट वृक्ष' का बीजारोपण किया है, उसकी छाया में आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी।
विनीत: श्री अनिल जैन (अध्यक्ष)
एवं समस्त संस्थापक न्यासीभारत वर्षीय दिगम्बर गोलालारे जैन सेवा न्यास
सोनागिर सिद्ध क्षेत्र, जिला दतिया, मध्य प्रदेश (भारत)